हादसे में मौत का शिकार हुई अलवर की किरण दे गई 4 लोगों को जिंदगी की नई ‘किरण’

हादसे में मौत का शिकार हुई अलवर की किरण दे गई 4 लोगों को जिंदगी की नई ‘किरण’
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Organ Donation: हादसे में जान गंवाने वाली किरण (Kiran) अपनी मौत के बाद भी चार लोगों को नई जिंदगी (New Life) दे गई है. किरण के ब्रेन डेड होने के बाद उसके परिजनों ने उसका दिल, किडनी और लीवर को दूसरों की जान बचाने के लिये दान कर दिये.

जयपुर

अलवर की किरण (Kiran) अपनी मौत के बाद भी प्रदेश के 4 लोगों को जिंदगी की नई ‘किरण’ (New Life) दे गई. हादसे में पहले घायल और बाद में ब्रेन डेड हुई 35 वर्षीय किरण के परिजनों ने उसके चारों अहम ऑर्गन डोनेट (Organ donate) कर दिये हैं. अब किरण का दिल किसी ओर के सीने में धड़केगा. वहीं लिवर और किडनी से किसी अन्य को नई जिंदगी मिलेगी.

अलवर जिले के केरवावाल गांव निवासी किरण ने महज 35 वर्ष की आयु में ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन दुनिया छोड़ते-छोड़ते भी वह अपने निशां यहां छोड़ गई. किरण का 18 जनवरी को भजीट गांव में एक्सीडेंट हो गया था. उसके बाद उसे पहले अलवर के जिला अस्पताल से निजी हॉस्पिटल रेफर किया गया. बाद में वहां से उसे राजधानी जयपुर के एसएमएस रेफर कर दिया गया. सिर में चोट की वजह से किरण को यहां ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था.

ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया

ब्रेन डेड होने के बाद चिकित्सकों की सलाह से परिजनों ने उसके अंगदान करने का निर्णय लिया. ग्रामीण परिवेश के चलते समाज और अन्य लोगों ने उसके परिजनों को ऐसा करने मना कर दिया. लेकिन परिजनों की जिद के आगे सभी को झुकना पड़ा. आखिरकार आज किरण का हार्ट, लिवर और दोनों किडनी किसी ओर को लगाए गये. किरण का हार्ट EHCC अस्पताल को दिया गया. हार्ट को ले जाने के लिए स्थानीय पुलिस व प्रशासन की ओर से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. वहीं लिवर और किडनी एमएमएस अस्पताल को दिये गये.

किरण को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई

ऑर्गन डोनेशन के बाद किरण की पार्थिव देह परिजनों को सौंप दी गई. किरण को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई. इस मौके पर स्टेट ऑर्गन टीशू एंड ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के कंस्लटेंट डॉ. मनीष शर्मा और ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. अमरजीत मेहता ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की.

ऑर्गन के अभाव में कई लोगों की जान चली जाती है

किरण इनती सी उम्र में चार लोगों को नई जिंदगी दे गई. लेकिन आज भी ना जाने कितने ही लोगों की ऑर्गन नहीं मिलने से जान चली जाती है. ऐसे में अब समय आ गया है कि हम सब किरण और इनके जैसे लोगों से प्रेरणा लेकर ऑर्गन डोनेट करने की शपथ लें और लोगों का जीवन बनाने का जरिया बने.



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