प्रदर्शन रोकने नहीं हत्या के इरादे से गोलियां चला रही है सेना- रिपोर्ट्स

प्रदर्शन रोकने नहीं हत्या के इरादे से गोलियां चला रही है सेना- रिपोर्ट्स
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नेपिताव.

म्यांमार (Myanmar) में बीती 1 फरवरी को तख्तापलट (Coup) के बाद सैन्य शासन शुरू हो गया है. माना जा रहा है कि तब से लेकर अब तक देश की मिल्ट्री जुंटा के हाथों 54 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. देश में सैन्य शासन के खिलाफ आम जनता विरोध कर रही है. चार हफ्तों के प्रदर्शनों के दौरान बीता बुधवार सबसे खूनी दिन साबित हुआ. सेना ने देशभर में भीड़ पर गोलीबारी कर दी. इस दौरान कम से कम 38 लोग मारे गए थे. हिंसा की सामने आईं तस्वीरें और परिवार के साथ बातचीत इस ओर इशारा करती हैं कि जुंटा के सुरक्षा बल अब हत्या करने के लिए गोलियां चला रहे हैं.

रिसर्च के लिए एम्नेस्टी इंटरनेशनल की डिप्टी रीजनल डायरेक्टर एमर्लीन गिल ने गुरुवार को कहा ‘सबकुछ इस ओर इशारा करता है कि प्रदर्शन को दबाने के लिए सेना हत्या के लिए गोली मारने का तरीका अपना रही है.’ उन्होंने कहा ‘और सैन्य प्रशासन की तरफ से चुप्पी के चलते यह माना जा रहा है कि ये सब सरकार की मंजूरी से हो रहा है.’ एम्ननेस्टी ने कहा कि पूरे म्यांमार से दुखी करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं, ये जनरल मिन ऑन्ग लैंग की कमान में क्रूरता का सबूत देती हैं.

गिल की तरफ से जारी बयान के अनुसार, ‘हम अवैध हत्याओं में बढ़त देख रहे हैं, जिसमें बगैर न्यायिक मंजूरी के हुई हत्याएं भी शामिल हैं. साथ ही इस घातक बल को काबू करने का कोई स्पष्ट प्रयास नहीं किया गया. अगर कुछ किया गया है, तो वह है कि हर गुजरते दिन के साथ सुरक्षा बल घातक हथियारों की तैनाती में बढ़त करते नजर आ रहे हैं.’

मिलिट्री जुंटा ने पहले दावा किया था कि उन्होंने ‘अराजक भीड़’ के सामने संयम दिखाया था. वहीं, सरकारी अखबार ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार ने कहा ‘दंगाई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाएगी.’ बीते शुक्रवार को म्यांमार पुलिस ने अखबार से कहा ‘दंगाई दो हथियारों से लैस थे, जिन्हें स्मोक ग्रेनेड्स माना जा रहा है.’ ये बुधवार को हुए प्रदर्शन में मिले हैं.

 

रिपोर्ट के अनुसार ‘प्रदर्शनकारी प्रदर्शन के आम स्तर पर नहीं थे, बल्कि विस्फोटकों से लैस थे और हिंसा का सहारा ले रहे थे.’ हालांकि, इसे लेकर कोई भी सबूत पेश नहीं किया गया है. नए सैन्य शासन को खत्म करने के लिए म्यांमार के सभी वर्गों के लोग प्रदर्शनों में शामिल हो गए हैं. बगैर नेतृत्व के इस आंदोलन के अगुवा युवा हैं. उन्हें लगता है कि जैसे उनका भविष्य उनसे छीन लिया गया है. मास्क और हेलमेट्स के साथ युवा प्रदर्शन के अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं. वे बैरिकेड्स तैयार कर रहे हैं और सुरक्षा बलों का सामना कर रहे हैं. उन्हें बड़े स्तर पर नुकसान भी उठाना पड़ा है.

म्यांमार में पुलिस की गोलियों से बचने के लिए कई लोग खुद की शील्ड लिए दिखे.

असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स ने 48 लोगों की पहचान की है, जो प्रदर्शनकारियों के साथ हुई हिंसा के दौरान मारे गए हैं. इनमें से आधे लोगों की उम्र 25 से कम थी. जबकि, 17 लोग 20 साल से कम उम्र के थे. जान गंवाने वालों में सबसे छोटा 14 साल का लड़का था. गुरुवार को यूनिसेफ ने कहा कि वयस्कों के साथ-साथ कम से कम 5 बच्चों की मौत हुई है. कम से कम चार बच्चे बुरी तरह जख्मी हुए हैं. मारे गए लड़कों की उम्र 14 से 17 साल के बीच है. मानवाधिकार विशेषज्ञ जॉन किन्ले कहते हैं कि प्रदर्शन कर रहे ज्यादातर युवा 20-30 साल के हैं.

 

किन्ले ने कहा ‘ये म्यांमार की अगली पीढ़ी है, जो चाहती है कि देश का नेतृत्व लोकतांत्रिक सरकार करे. और वे चाहते हैं कि उनके नेता मानवाधिकार के सिद्धांतों ऊंचा रखें. ये वही लोग हैं, जो सड़कों पर मर रहे हैं.’ अधिकार समूहों का कहना है कि मिलिट्री जुंटा जिस तरह बल का इस्तेमाल कर रही है, उससे यह पता चलता है कि वे केवल भीड़ को नियंत्रित करने के इरादे से प्रदर्शनकारियों के सामने नहीं जा रहे हैं.

किन्ले ने कहा ‘प्रदर्शनकारियों को हटाने का यह कानूनी तरीका नहीं है. ये पूरे देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला है. और ये भीड़ को नियंत्रित करने की तकनीक नहीं है, ये आम जनता और उन लोगों पर हमला है, जो सैन्य सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.’

म्यांमार में संयुक्त राष्ट्र के टॉम एंड्र्यूस बताते हैं ‘वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर 12 गेज शॉट गन, 38 एमएम राइफल और सेमी ऑटोमैटिक राइफल का इस्तेमाल कर रहे हैं.’ तमाम खतरों के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर लौटना जारी रखा है. शुक्रवार को पुलिस ने मेंडले में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इसमें एक युवा की मौत हो गई.

 

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