सीएम गहलोत ने साधा केंद्र पर निशाना, कहा- शर्मनाक तरीके से पारित हुए कृषि विधेयक

सीएम गहलोत ने साधा केंद्र पर निशाना, कहा- शर्मनाक तरीके से पारित हुए कृषि विधेयक
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जयपुर

 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को तीन किसान संबंधी विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। गहलोत ने कहा कि इन विधेयकों को बिना मंडी व्यापारियों और विपक्षी पार्टियों से चर्चा किए बगैर संसद में पेश किया गया। उन्होंने कहा कि ये विधेयक शर्मनाक तरीके से पारित कराए गए।

मुख्यमंत्री गहलोत ने दावा किया कि विधेयकों में तय किए गए सभी प्रावधान किसान विरोधी हैं और इनसे मंडियों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। उन्होंने केंद्र पर किसानों का अहित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन विधेयकों के पारित होने के बाद अब देश के किसानों की क्या स्थिति होगी, यह कल्पना से परे है।

गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ‘कानून किसलिए बनाया गया था? न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को प्रस्तावित क्यों नहीं किया गया था? आप इससे समझ सकते हैं कि स्थिति बहुत गंभीर है और जिस तरीके से ये तीनों विधेयक पारित कराए गए, यह बहुत शर्मनाक तरीके से किया गया।’

केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए गहलोत ने कहा, ‘ये फासीवादी सोच के लोग हैं, लोकतंत्र में इनका विश्वास नहीं है। इसलिए वो ऐसे काम कर रहे हैं जिससे जनता का ध्यान हटाया जा सके। विधेयकों में किए गए सारे प्रावधान किसान विरोधी हैं। मंडियां समाप्त हो जाएंगी। मुझे बहुत बड़ी बर्बादी के लक्षण दिख रहे हैं।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडियों के स्थापित होने में 40 से 50 साल तक का समय लग गया और सरकार ने बिना व्यापारियों से विचार-विमर्श किए ही उन्हें जड़ से उखाड़ने का फैसला कर दिया। मुख्यमंत्री गहलोत ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने यह कदम बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए उठाया है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को तीन किसान संबंधी विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। गहलोत ने कहा कि इन विधेयकों को बिना मंडी व्यापारियों और विपक्षी पार्टियों से चर्चा किए बगैर संसद में पेश किया गया। उन्होंने कहा कि ये विधेयक शर्मनाक तरीके से पारित कराए गए।

मुख्यमंत्री गहलोत ने दावा किया कि विधेयकों में तय किए गए सभी प्रावधान किसान विरोधी हैं और इनसे मंडियों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। उन्होंने केंद्र पर किसानों का अहित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन विधेयकों के पारित होने के बाद अब देश के किसानों की क्या स्थिति होगी, यह कल्पना से परे है।

 

गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ‘कानून किसलिए बनाया गया था? न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को प्रस्तावित क्यों नहीं किया गया था? आप इससे समझ सकते हैं कि स्थिति बहुत गंभीर है और जिस तरीके से ये तीनों विधेयक पारित कराए गए, यह बहुत शर्मनाक तरीके से किया गया।’

केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए गहलोत ने कहा, ‘ये फासीवादी सोच के लोग हैं, लोकतंत्र में इनका विश्वास नहीं है। इसलिए वो ऐसे काम कर रहे हैं जिससे जनता का ध्यान हटाया जा सके। विधेयकों में किए गए सारे प्रावधान किसान विरोधी हैं। मंडियां समाप्त हो जाएंगी। मुझे बहुत बड़ी बर्बादी के लक्षण दिख रहे हैं।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडियों के स्थापित होने में 40 से 50 साल तक का समय लग गया और सरकार ने बिना व्यापारियों से विचार-विमर्श किए ही उन्हें जड़ से उखाड़ने का फैसला कर दिया। मुख्यमंत्री गहलोत ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने यह कदम बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए उठाया है।

 

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