रिफंड में देरी से प्रभावित होते उद्योग और रोजगार

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रिफंड में देरी से प्रभावित होते उद्योग और रोजगार

  • GST और ड्यूटी ड्रॉबैक रिफंड में तेजी लाने की जरूरत
  • …तो जीडीपी में होगा 2% का इजाफा : एक्जिम बैंक

मुंबई. जीएसटी रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक रिफंड में होने वाली देरी से देश के उद्योग और निर्यात क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है और यदि जीएसटी रिफंड त्वरित आधार पर हो तो जीडीपी 2%, निर्यात 7%, कुल आयात 6% और रोजगार करीब 4% तक बढ़ सकते हैं. टेक्सटाइल्स, जेम-ज्वैलरी जैसे कुछ उद्योग क्षेत्रों में जीएसटी के त्वरित रिफंड का प्रभाव काफी अधिक होगा और निर्यातों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की जा सकती है. इसलिए GST रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक रिफंड में तेजी लाने की जरूरत है. यह बात इंडिया एक्जिम बैंक की एक रिसर्च रिपोर्ट में कही गई है.

नीतियों का सफल क्रियान्वयन आवश्यक

इंडिया एक्जिम बैंक की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार निर्यातों के संवर्द्धन और बेहतर परिचालन परिवेश बनाने के लिए नीतियां बना रही है, किन्तु इसके साथ-साथ उन बाधाओं को दूर करने पर फोकस करने की भी जरूरत है, जिनके चलते इन नीतियों का सफल क्रियान्वयन नहीं हो पाता है. ‘चुनिंदा क्षेत्रों में निर्यातों के लिए घरेलू बाधाएं’ विषय वाली इस रिसर्च रिपोर्ट में चुनिंदा क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली घरेलू नीतिगत बाधाओं का विश्लेषण किया गया है. इनमें टेक्सटाइल्स-अपैरल, रत्न-आभूषण, ऑटोमोबाइल और ऑटो उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल फोन) और फार्मास्युटिकल्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इस रिपोर्ट में देश में विभिन्न उत्पादों के लिए वैश्विक निर्यात केंद्र बनाने हेतु नीतियां भी चिह्नित की गई हैं.

 

उत्पादन उन्मुख नई प्रोत्साहन योजना जरूरी

रिपोर्ट में उन विषयों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिनसे विभिन्न क्षेत्रों में निर्यातकों को गुजरना पड़ता है. इनमें अन्य के साथ-साथ बंदरगाहों पर लागत कम करने के लिए सरकार का सीधा हस्तक्षेप करने, विशेष रूप से, ‘भारत से वस्तु निर्यात योजना’ (एमईआईएस) के खत्म होने के बाद कोई उत्पादन उन्मुख आकर्षक प्रोत्साहन योजना लाने, सरकार द्वारा मंजूरियों और रिफंड तथा कस्टम मंजूरी में लगने वाले समय को कम करने तथा विनिर्माण उद्योग में सुधार के लिए जीएसटी रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक रिफंड में तेजी लाने की जरूरत जैसे उपाय शामिल हैं.

रिफंड त्वरित करने की कोशिश : गोयल

इस रिपोर्ट का विमोचन ‘निर्यातों में नीतिगत बाधाओं को दूर करने की रणनीतियां’ विषय पर आयोजित एक वेबिनार के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किया. इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने निर्यात व्यापार एवं घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और भारतीय निर्यातकों की स्पर्द्धात्मकता बढ़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि कोविड संकट आने के कारण रिफंड में देरी हो रही है. लेकिन सरकार का इस पर ध्यान है और सभी रिफंड समय त्वरित करने की कोशिश कर रही है. गोयल ने कहा कि उद्योगों को अपने उत्पादों की उच्च गुणवत्ता और बेहतर प्रौद्योगिकी पर भी ध्यान देना चाहिए. यदि उत्पाद अच्छे और प्रतिस्पर्धी कीमत वाले होंगे तो निश्चित रूप से निर्यात बढ़ेगा.

 

भारत के लिए नए अवसर : रस्कीना

इंडिया एक्जिम बैंक के प्रबंध निदेशक डेविड रस्कीना ने कहा कि वर्तमान में महामारी के चलते अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. किन्तु इससे भारत जैसे देशों को वैश्विक वैल्यू चेन एकीकरण बढ़ाने का भी अवसर मिला है. क्योंकि अधिकतर देश लचीली सप्लाई चेन बनाने के लिए वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता जोड़ना चाहते हैं. भारत सरकार के प्रयासों से वैश्विक कंपनियां भारत में निर्माण के लिए आ रही हैं. एप्पल और सैमसंग जैसी दिग्गज कंपनियां भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधा लगा रही हैं.

समय पर हो रिफंड : राजगोपाल

वस्त्र निर्यातकों की संस्था ‘टेक्सप्रोसिल’ के कार्यकारी निदेशक सिद्धार्थ राजगोपाल ने कहा कि जीएसटी रिफंड मिलने में औसतन दो से तीन महिने लग रहे हैं. जबकि नियमानुसार 7 दिन में रिफंड मिलना चाहिए. ड्यूटी ड्रॉबैक रिफंड भी समय पर नहीं मिल पा रहा है. रिफंड में देरी से वस्त्र निर्यातकों को लिक्विडिटी की कमी से जूझना पड़ रहा है. रिफंड में देरी कोविड संकट की वजह से भी हो सकती है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.

छोटे-मझौले उद्यमियों को ज्यादा परेशानी :शाह

ज्वैलरी निर्यातक फर्म नाइन डीएम के अध्यक्ष संजय शाह ने कहा कि रिफंड मे देरी से छोटे एवं मझौले उद्यमियों को ज्यादा परेशानी हो रही है. क्योंकि उनका पैसा सरकार के पास अटक रहा है. पूंजी के अभाव में वे समय पर उत्पादन कर आपूर्ति नहीं कर पाते हैं. इसका सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ रहा है. इस समय कोविड संकट के कारण वैसे ही नए ऑर्डर बहुत कम मिल रहे हैं. इस पर भी रिफंड में देरी से पूंजी सकंट पैदा होना दोहरी मार है.

छोटे रिफंड आने में ज्यादा विलंब : ठक्कर

खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा कि बड़े रिफंड तो फिर भी दबाव में जल्दी हो रहे हैं, लेकिन छोटे रिफंड आने में 8 से 10 महिने लग जाते हैं. हाल ही में वित्तमंत्री ने सभी लंबित रिफंड जल्द करने का निर्देश भी दिया था. लेकिन इसके बावजूद रिफंड में देरी हो रही है. ऐसे में पूंजी फंस जाने से कारोबार प्रभावित हो रहा है.

कोविड संकट के बाद रिफंड में देरी : मिश्रा

वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद शुरू में रिफंड में काफी समय लग रहा था. लेकिन इस साल जनवरी से काफी हद तक जीएसटी रिफंड समय पर होने लगे थे और मार्च तक अधिक समस्या नहीं थी, लेकिन अब फिर विलंब हो रहा है. परंतु इसका मुख्य कारण कोविड संकट लग रहा है. उम्मीद है सरकार रिफंड में देरी की समस्या को जल्द दूर करेगी.

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