जालोर किले तक सडक़ बनाने को लेकर जिला कलक्टर ने देखा मौका

जालोर किले तक सडक़ बनाने को लेकर जिला कलक्टर ने देखा मौका
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जालोर. जालोर दुर्ग तक एक दशक से अटकी पड़ी सडक़ निर्माण की मुहिम के बीच कलक्टर नम्रता वृष्णि ने रविवार को दुर्ग का विजिट किया। करीब 2 हजार सीढिय़ों को पार कर कलक्टर स्वर्णगिरी दुर्ग तक पहुंची। उन्होंने किले पर मौजूद मंदिर, मस्जिद, पोल, चौकी, महल आदि देखकर जिले के समृद्ध इतिहास की जानकारी ली।

साथ ही उन्होंने पहाड़ी पर हरियाली की मुहिम को जारी रखने, पर्यटकों के लिए विशेष सुविधाएं करने, जिले को पर्यटन मानचित्र पर उभारने के लिए विशेष प्रयास करने की बात कही। इस दौरान उपखण्ड अधिकारी चंपालाल जीनगर सहित राजस्व विभाग, वन विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी कर्मचारी साथ थे।

गौरतलब है पिछले साल के अंत में तत्कालीन कलक्टर हिमांशु गुप्ता की सकारात्मक मुहिम के तहत सडक़ निर्माण के लिए जयपुर से टीम पहुंची थी और सर्वे का री-अलाइनमेंट भी किया था और इस मामले की फाइल जयपुर में अटकी पड़ी है। यदि दुर्ग तक सडक़ निर्माण रास्ता साफ हो जाता है तो जालोर पर्यटन मानचित्र पर निखरेगा और जालोर में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

यह सबकुछ हो चुका

जालोर दुर्ग तक वर्ष 2011-12 में तत्कालीन कलक्टर राजन विशाल के समय रोप-वे और सडक़ निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार हुए थे, लेकिन मामले ठंडे बस्ते में चले गए। उसके बाद भारत सरकार की ओर से इस प्रोजेक्ट के लिए रोप वे के लिए 8 करोड़ स्वीकृत किए गए, लेकिन एजेंसियों ने राशि कम होने का हवाला देते हुए रुचि नहीं दिखाई। इस बीच पिछले साल के अंत में दानदाताओं ने सर्वे के व्यय का बीड़ा उठाया और पहल शुरु हुई। इस बीच कोरोना के प्रभाव के साथ यह मामला अटक गया।

अब यह अच्छी बात

जालोर दुर्ग के लिए झरणेश्वर महादेव मार्ग से होते हुए सडक़ निर्माण के लिए पहले स्तर का सर्वे किया गया था और इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी गई थी] अब पहले स्तर पर इस पर सहमति मिल चुकी है और पार्ट वन का कार्य पूरा हो चुका है। इस कार्य के लिए नगरपरिषद एजेंसी है। अब दूसरे स्टेज पर संबंधित एजेंसी की ओर से रोड के लिए मार्किंग करवाई जाएगी। जिसके बाद वन विभाग इसका वेरिफिकेशन करेगा और वन विभाग के स्तर पर मुख्यालय को एक रिपोर्ट जाएगी।

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