इटली और फ्रांस में हटेगा एस्ट्राजेनेका से बैन, Brexit से जुड़े थे प्रतिबंध के तार!

इटली और फ्रांस में हटेगा एस्ट्राजेनेका से बैन, Brexit से जुड़े थे प्रतिबंध के तार!
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  • इटली (Italy) और फ्रांस में जल्द ही एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लोगों को फिर से दी जा सकेगी

  • द सन की खबर बताती है कि इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी और फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के बीच वैक्सीन को लेकर बातचीत हो चुकी है

नई दिल्ली.

एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) की कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) पर लगी रोक पर जल्द ही एक बड़ा फैसला आ सकता है. इटली और फ्रांस ने वैक्सीन पर लगी रोक को हटाने का फैसला लिया है. दोनों देशों के प्रमुखों ने इस संबंध में चर्चा भी की है. ऐसा बताया जा रहा है कि वैक्सीन राजनीतिक कारणों के चलते प्रतिबंध लगाया गया था. इस बैन के तार ब्रैग्जिट (Brexit) मुद्दे से जुड़े हुए थे.

इटली और फ्रांस में जल्द ही एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लोगों को फिर से दी जा सकेगी. द सन की खबर बताती है कि इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी और फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनु्ल मैक्रों के बीच वैक्सीन को लेकर बातचीत हो चुकी है. दोनों राष्ट्रों का कहना है कि वे यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी के बयान के इंतजार में थे. कहा जा रहा है कि वैक्सीन पर लगाया गया बैन एक राजनीतिक फैसला था. वैक्सीन का निर्माण एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड ने मिलकर किया है. इसी बीच यूरोपीय देशों ने ब्रैग्जिट के चलते वैक्सीन पर रोक लगा दी.

एजेंसी ने किया खून के थक्के जमने की बात से इनकार

यूरोपीय औषधि एजेंसी के प्रमुख ने कहा है कि इस बारे में कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं कि एस्ट्राजेनेका टीके लगवाने के बाद रक्त के थक्के जम गये.यह टीका लगाए जाने के बाद रक्त के कथित तौर पर थक्के जमने की खबरों को लेकर कई यूरोपीय देशों ने इसके उपयोग को स्थगित कर दिया था. एस्ट्राजेनेका का कोविड-19 रोधी टीका लगवाने के बाद खून के थक्के जमने के गंभीर मामले सामने आने के बाद जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन ने सोमवार को इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी.

हालांकि कंपनी तथा यूरोपीय नियामकों का कहना था कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह बताता हो कि ऐसी घटनाएं इस टीके के कारण हुई हैं. यूरोपीय संघ की EMA ने एस्ट्राजेनेका के बारे में विशेषज्ञों के निष्कर्षों की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई थी. कई देशों ने टीकाकरण कार्यक्रम के रुकने के फैसले का विरोध किया था.



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