राजस्थान : कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के नए फार्मूले से जालोर और सिरोही में उलटफेर होना सम्भव

राजस्थान : कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के नए फार्मूले से जालोर और सिरोही में उलटफेर होना सम्भव
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कांग्रेस की नई कवायद : 39 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जाएगा, चुनाव नहीं लडऩे वाले बनेंगे जिलाध्यक्ष

  • जिलाध्यक्षों के नए फार्मूले को लेकर पीसीसी की घोषित होने वाली टीम के साथ जिलाध्यक्षों के नाम का ऐलान नहीं किया जा रहा, वरिष्ठ नेताओं को जिलों में सर्वे की जिम्मेदारी सौपेंगे

दिनेश सुन्देशा

जयपुर/जालोर. राजस्थान में लम्बे समय बाद कांग्रेस जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर नया फार्मूला तैयार करने जा रही है। माना जा रहा है कि जिला अध्यक्ष पद पर उन्हीं नेताओं को नियुक्ति दी जाएगी, जो चुनाव लडऩे के इच्छुक नहीं हों।

चुनाव नहीं लडऩे वाले नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाने के पीछे माना जा रहा है कि इससे जिलाध्यक्षों का पूरा फोकस संगठन की मजबूती पर रहेगा। इसी वजह से पीसीसी की घोषित होने वाली टीम के साथ जिलाध्यक्षों के नामों का ऐलान नहीं किया जा रहा है। जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए प्रदेश कांग्रेस वरिष्ठ नेताओं को जिलों में सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपेगी।

जालोर : जिलाध्यक्ष ने चुनाव लड़ा और हार गए

राजस्थान में पिछले विधानसभा चुनाव में जालोर से कांग्रेस के निवर्तमान जिलाध्यक्ष डॉ. समरजीतसिंह ने भीनमाल विधानसभा चुनाव लड़ा। यहां पर उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा और भाजपा से पूराराम चौधरी विजयी हुए थे। इतना ही नहीं जिले की ५ विधानसभाओं में से कांग्रेस को सिर्फ सांचौर विधानसभा पर जीत मिली थी। जिले की आहोर, जालोर, भीनमाल और रानीवाड़ा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी। कांग्रेस में आहोर से सवाराम पटेल, जालोर से मंजू मेघवाल, रानीवाड़ा से रतन देवासी को हार का मुंह देखना पड़ा था।

सिरोही : चुनाव में जमानत तक नहीं बचा पाए

राजस्थान के पिछले विधानसभा चुनावों में जालोर के बाद सिरोही विधानसभा में भी यही हाल देखने को मिला था। यहां पर भी कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष जीवाराम आर्य को टिकट दिया था। कांग्रेस से संयम लोढ़ा को टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और चुनाव भी जीत गए। वहीं यहां पर भाजपा के ओटाराम देवासी दूसरे नम्बर पर रहे, जो वसुंधरा सरकार में मंत्री रह चुके थे। यहां पर कांग्रेस को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे जीवाराम आर्य तीसरे नम्बर पर और अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे। इसके साथ ही कांग्रेस को सिरोही से तीनों विधानसभाओं में हार का मुंंह देखना पड़ा था। सिरोही की दो विधानसभा में भाजपा ने जीत दर्ज की थी, वहीं सिरोही-शिवगंज से संयम लोढ़ा ने निर्दलीय के तौर पर जीत दर्ज की।

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अजय माकन ने राजस्थान दौरे के दौरान जिलाध्यक्षों की नियुक्ति ​के लिए दिए थे नए फार्मूले के संकेत। फाइल फोटो

जिलाध्यक्ष… सौ फीसदी काम संगठन में ही हो

दरअसल, कांग्रेस पार्टी की निवर्तमान कार्यकारिणी में आधा दर्जन से ज्यादा जिलाध्यक्ष ऐसे हैं, जो जिलाध्यक्ष के साथ-साथ विधायक और सरकार में भागीदार भी हैं। ऐसे में पार्टी के थिंक टैंक की सोच हैं कि जिलाध्यक्षों पर दोहरी जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। जिलाध्यक्ष का सौ फीसदी काम संगठन में ही होना चाहिए, जिससे संगठन के कामकाज प्रभावित न हो। ऐसे में चुनाव नहीं लडऩे वाले नेताओं को ही जिलाध्यक्ष पद की कमान सौंपने वाला फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है।

विधानसभा और लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे जिलाध्यक्ष

प्रदेश कांग्रेस में इस बार जिलाध्यक्ष को लेकर नया फॉर्मूला तैयार हो रहा है, जिसके तहत चुनाव नहीं लडऩे वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को ही जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया जाएगा। प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने भी इसके संकेत दिए हैं। बताया जाता है कि जिलाध्यक्ष बनने वाले नेता और कार्यकर्ता विधानसभा और लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

कांग्रेस में कार्य विभाजन में भी मिलेगी मदद

कांग्रेस के निवर्तमान जिलाध्यक्षों की बात करें तो पार्टी के आधा दर्जन से ज्यादा जिलाध्यक्ष ऐसे हैं, जो सरकार में भागीदार हैं। इनमें प्रमुख रूप से परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास जो कि जयपुर शहर के निवर्तमान जिलाध्यक्ष है। साथ ही जयपुर देहात के निवर्तमान अध्यक्ष राजेंद्र यादव भी सरकार में मंत्री हैं। अलवर के निवर्तमान जिलाध्यक्ष टीकाराम जूली भी सरकार में मंत्री हैं। वहीं, झुंझुनूं के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह पार्टी के वरिष्ठ विधायक हैं। ऐसे में इस नए फार्मूले से ना केवल नए नेताओं को मौका मिल पाएगा बल्कि कांग्रेस में कार्य विभाजन में भी मदद मिलेगी।

प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के फीडबैक के आधार पर ही जिलाध्यक्षों के तय होंगे नाम

दरअसल, कार्यकारिणी की घोषणा के बाद जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की कवायद शुरू की जाएगी। प्रदेश में कांग्रेस के 39 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए बाकायदा स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जाएगा। फीडबैक के आधार पर ही जिलाध्यक्षों के नाम तय होंगे। प्रदेश कांग्रेस में कार्यकारिणी घोषित होने के बाद कार्यकारिणी में शामिल पदाधिकारियों को भी सभी जिलों में भेजा जाएगा। ये पदाधिकारी जिलाध्यक्षों को लेकर सम्बंधित जिलों में रायशुमारी करेंगे और जिलाध्यक्षों के दावेदारों के नाम प्रदेश कांग्रेस को सौंपेंगे।

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