vocal for local : ऑनलाइन खरीद से पहले स्थानीय दुकान पर जाने से मिल सकते है कई फायदे

vocal for local : ऑनलाइन खरीद से पहले स्थानीय दुकान पर जाने से मिल सकते है कई फायदे
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  • दीपावली सीजन को लेकर चल रहे ऑनलाइन डिस्काउंट के चक्कर में हो सकता है धोखा

जालोर

डिजीटल के बढ़ते प्रभाव के कारण ज्यादातर लोग Online Shoping करते है। जिसका मुख्य कारण आकर्षक स्कीम, डिस्कॉउंट, No Cost EMI, CashBack इत्यादि होता है। ऑनलाइन खरीद में MRP (अधिकतम खुदरा मूल्य) पर डिस्काउंट दिया जाता है। जबकि उतना ही या उससे ज्यादा डिस्काउंट स्थानीय दुकानों पर भी दिया जाता है। लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग के भारी भरकम विज्ञापनों के बहकावे में ज्यादातर ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग करते है।

ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग करने से पहले उसे मॉडल या प्रोडक्ट को लेकर स्थानीय दुकानदार से चर्चा करनी चाहिए। हो सकता है ग्राहक को ज्यादा फायदा स्थानीय दुकान से हो जाए। इसके अलावा ऑनलाइन शॉपिंग में फ्रॉड होने का भी खतरा रहता है, जबकि स्थानीय दुकान से शॉपिंग करने पर यह खतरा नहीं रहता।

इसलिए ऑनलाइन खरीद करने से पहले स्थानीय दुकान पर जरुर जाएं ताकि आपको पता लग सके कि ऑनलाइन रेट और स्थानीय दुकान की रेट में कितना डिफरेंस है।

नो कोस्ट ईएमआई… सामान बेचने का नुस्खा

नो कोस्ट ईएमआई ज्यादा सामान बेचने के लिए अपनाया जाने वाला नुस्खा है। नो कॉस्ट ईएमआई देखकर किसी भी सामान को खरीदने की जल्दबाजी न करें उसके बारे में अच्छे से पढ़ें। बैंक दिए गए डिस्काउंट को ब्याज के रूप में वापस ले लेता है। नो-कॉस्ट ईएमआई स्कीम आम तौर पर 3 तरीके से काम करती है। पहला तरीका यह कि नो कॉस्ट ईएमआई पर आपको प्रोडक्ट पूरी कीमत पर खरीदना होता है।

इसमें कंपनियां ग्राहकों को दिए जाने वाला डिस्काउंट को बैंक को ब्याज के तौर पर देती है। दूसरा तरीका यह कि कंपनी ब्याज की राशि को पहले ही उत्पाद की कीमत में शामिल कर देती है। वहीं तीसरा तरीका होता है कि कंपनी का जब कोई सामान नहीं बिक रहा होता है तो उसे निकालने के लिए भी नो-कॉस्ट ईएमआई का सहारा लेती है।

इसलिए… पहले जांच करना जरूरी

भारी छूट के लालच में फंसने से पहले, जांच लें कि क्या ये सही उत्पाद है या नहीं। यदि आप कुछ खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप इसकी कीमत पर नजर बनाए रखें। बाजार में किसी भी प्रोडक्ट के भाव उतरते ही ऑनलाइन शॉपिंग की डिस्कॉउंट की मार्केटिंग शुरू हो जाती है। जबकि दुकान पर यही डिस्काउंट कर दिया जाता है, लेकिन इसकी जानकारी आम लोगों तक नहीं होती।

डिस्काउंट… का लालच

फेस्टिवल सेल में ऑनलाइन शॉपिंग में कंपनियां 80 फीसदी तक डिस्काउंट का दावा कर रही हैं। लेकिन ये डिस्काउंट केवल कुछ ही प्रोडक्ट पर रहता है। बाकी उत्पादों पर छूट उतनी अधिक नहीं हो सकती है। इसके अलावा कंपनी अपने पुराने स्टॉक को खत्म करने के लिए भी ज्यादा डिस्काउंट देती है। ऐसे में खरीदने से पहले उसकी ठीक से जांच करनी चाहिए।

कैशबैक… को समझने की जरुरत

जिस प्रोडक्ट के साथ कैशबैक मिल रहा है उसकी शर्तों को जरूर समझें। कई बार किसी प्रोडक्ट पर कैशबैक कूपन मिलते हैं और कूपन यूज करने की अलग कंडिशन और लिमिटेशन होती है।

ज्यादा डिस्काउंट में रिटर्न पॉलिसी जांचें

ऑनलाइन शॉपिंग में ज्यादा डिस्काउंट मिलने के लालच में प्रोडक्ट तो खरीद लिया जाता है, लेकिन पसंद न आने पर या खराब क्वालिटी होने पर रिटर्न की पॉलिसी नहीं होती। ऐसे में स्थानीय दुकान पर देख-परख कर खरीदारी करना ज्यादा फायदेमंद होता है। इसके अलावा उसकी सर्विस में भी ज्यादा माथापच्ची करने की जरुरत नहीं होती।

इनका कहना है…

ऑनलाइन शॉपिंग में डिस्काउंट की मार्केटिंग इतनी तगड़ी होती है कि ग्राहक स्थानीय दुकान तक नहीं जाता, जबकि हम भी एमआरपी पर डिस्काउंट देते है। इसके अलावा कई मोबाइल पर हम ऑनलाइन से ज्यादा ही डिस्काउंट करते है। ऐसे में ग्राहक को चाहिए कि वह खरीदारी से पहले स्थानीय दुकानदार से एक बार डिस्कस जरूर करे।
– छगन सोलंकी, मोबाइल व्यापारी, जालोर

ऑनलाइन शॉपिंग के जो डिस्काउंट दिखाया जाता है वह घूमफिर कर हम जितना देते है लगभग उसके बराबर ही होता है। वहीं दुकान से ग्राहक प्रोडक्ट से पूर्ण रूप से संतुष्ट होकर खरीदता है। उस प्रोडक्ट की सर्विस भी हमारी ओर से काफी सुविधाजनक होती है। ग्राहक को कहीं भी चक्कर काटने की जरुरत नहीं होती।
– प्रवीण खण्डेलवाल, उपाध्यक्ष, व्यापार मंडल, जालोर


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