विकीलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे अमेरिका नहीं भेजे जाएंगे, ब्रिटिश कोर्ट ने प्रत्यर्पण की अपील ठुकराई

विकीलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे अमेरिका नहीं भेजे जाएंगे, ब्रिटिश कोर्ट ने प्रत्यर्पण की अपील ठुकराई
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लंदन

विकीलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे को ब्रिटेन की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अंसाजे को अमेरिका को सौंपने से इनकार कर दिया है। असांजे अमेरिकी सेना से जुड़े गोपनीय दस्तावेज लीक करने और जासूसी के आरोपों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका ब्रिटेन से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।

डिस्ट्रिक्ट जज वेनेसा बेरैट्सर ने कहा कि असांजे को अमेरिका को नहीं सौंपा जाना चाहिए। ऐसा करना दमनकारी होगा। इससे पहले असांजे को स्वीडन में रेप के एक मामले में भी राहत मिल चुकी है।

लंदन की जेल में हैं असांजे

असांजे को 2010 में स्वीडन की अपील पर लंदन में गिरफ्तार किया गया था। उन पर स्वीडन की दो महिलाओं ने रेप का आरोप लगाया था। स्वीडन भेजे जाने से बचने के लिए असांजे ने 2012 में लंदन में इक्वाडोर के दूतावास में शरण ली थी। इस तरह वे गिरफ्तारी से बच गए।

बाद में इक्वाडोर की सरकार ने उन्हें शरण देने से इनकार कर दिया था। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय समझौतों के लगातार उल्लंघन करना बताया गया था। 2019 में दूतावास से बाहर आने पर ब्रिटेन की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। स्वीडन ने नवंबर 2019 में रेप के आरोप वापस ले लिए। इसके बावजूद असांजे जेल में ही रहे।

इराक युद्ध से जुड़े चार लाख डॉक्यूमेंट लीक किए थे

असांजे ने विकिलीक्स की वेबसाइट पर इराक युद्ध से जुड़े चार लाख दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। इसके जरिए उन्होंने अमेरिका, इंग्लैंड और नाटो की सेनाओं पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया था। असांजे पर यह भी आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रूसी खुफिया एजेंसियों ने हिलेरी क्लिंटन के कैम्पेन से जुड़े ईमेल हैक कर उन्हें विकीलीक्स को दिए थे।

गिरफ्तारी के डर ने छिपने पर मजबूत किया

जुलियन असांजे विकीलीक्स की स्थापना से पहले कंप्यूटर प्रोग्रामर और हैकर थे। उनके काम की वजह से 2008 में उन्हें इकोनॉमिस्ट फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन और 2010 में सैम एडम्स अवॉर्ड दिया गया। इसी बीच उन्होंने अमेरिका-इराक युद्ध से जुड़े दस्तावेज अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिए।

इनमें अमेरिका, इंग्लैंड और नाटो की सेनाओं के गंभीर युद्ध अपराध करने के सबूत थे। तब अमेरिका के राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा ने उन्हें चेतावनी दी थी। इसके बाद गिरफ्तारी के डर से वे छिपकर रह रहे थे।

 

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